80sTrend: जब 80 के दशक में बदला भारत का कारोबार; Infosys, Maruti 800 से लेकर Maggi तक ने रची इतिहास की नई इबारत

80sTrend:

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों #80sTrend ज़ोरों पर छाया हुआ है। लोग 80 के दशक की अपनी पुरानी तस्वीरें शेयर कर उस दौर की यादों को फिर से ताज़ा कर रहे हैं। कोई उस ज़माने के फैशन और घरों की यादें साझा कर रहा है, तो कोई पुराने बाज़ारों की। इसी ट्रेंड के बीच आइए मुड़कर देखते हैं 80 के दशक की भारतीय कॉरपोरेट दुनिया की ओर—यह वही दौर था जब बदलते भारत की कारोबारी तस्वीर की नींव रखी जा रही थी।

आज जिन भारतीय कंपनियों और ब्रांड्स का डंका पूरी दुनिया में बजता है, उनमें से कई की शुरुआत इसी ऐतिहासिक दशक में हुई थी।

1980 का दशक: जब शुरू हुआ नए भारत का व्यापार 80 का दशक भारतीय कॉरपोरेट जगत के लिए बेहद अहम साबित हुआ। एक तरफ जहाँ पारंपरिक घराने जमे हुए थे, वहीं दूसरी तरफ नई सोच वाले कॉर्पोरेट्स और बिजनेस मॉडल सामने आ रहे थे:

  • IT सेक्टर की क्रांति: 1981 में एन. आर. नारायण मूर्ति और उनके साथियों ने Infosys की शुरुआत की, जिसने भारत को ग्लोबल आईटी हब बनाया। इसी दौर में (1980) Wipro ने भी आईटी क्षेत्र में कदम रखा।

  • सड़कों पर उतरी Maruti 800: 1981 में स्थापित Maruti Suzuki ने 1983 में अपनी आइकॉनिक कार ‘Maruti 800’ लॉन्च की। इसने भारतीय मध्यम वर्ग के लिए कार के सपने को सच कर दिया। इससे पहले सड़कों पर सिर्फ एम्बेसडर (Ambassador) और फिएट (Fiat Padmini) का जलवा था।

  • संगीत और घड़ियों का बदला तरीका: 1983 में गुलशन कुमार ने T-Series की शुरुआत कर कैसेट और म्यूजिक इंडस्ट्री को बदलकर रख दिया। वहीं 1984 में टाटा ग्रुप और TIDCO ने मिलकर Titan की नींव रखी, जिसने भारतीयों के घड़ी पहनने के अंदाज़ को बदल दिया।

  • बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर: 1985 में उदय कोटक ने Kotak Mahindra की शुरुआत की और 1984 में गैस क्षेत्र की दिग्गज कंपनी GAIL की स्थापना हुई।

धीरूभाई अंबानी का उदय और Sensex की शुरुआत 80 के दशक में धीरूभाई अंबानी के नेतृत्व में Reliance Industries ने टेक्सटाइल से आगे बढ़कर पेट्रोकेमिकल्स में कदम रखा और रिकॉर्ड विस्तार किया। रिलायंस ने ही आम भारतीय को शेयर बाज़ार और इक्विटी कल्चर से जोड़ना सिखाया। इसी ऐतिहासिक दौर में यानी 1986 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक ‘Sensex’ की शुरुआत हुई।

हालाँकि, नए ब्रांड्स के उभार के बावजूद Tata और Birla जैसे पुराने घरानों का दबदबा कायम था, जिनकी बाजार वैल्यू अकेले सेंसेक्स की कुल वैल्यू की लगभग 45 फीसदी थी।

निरमा के ‘सबको भाए’ से लेकर ‘2-मिनट मैगी’ तक उपभोक्ता बाज़ार (FMCG) में भी 80 के दशक ने कई इतिहास रचे:

  • सस्ते और प्रभावी Nirma डिटर्जेंट ने निरमा गर्ल के विज्ञापन के साथ सर्फ (Surf) जैसे बड़े ब्रांड्स को कड़ी टक्कर दी।

  • 1983 में नेस्ले ने Maggi (2-Minute Noodles) भारत में उतारी, जो देखते ही देखते हर भारतीय घर और बच्चों की पहली पसंद बन गई।

  • HMT की घड़ियों पर देश का अटूट भरोसा था, तो वहीं पार्ले के Thums Up, Gold Spot और Limca जैसे सॉफ्ट ड्रिंक्स बाज़ार पर राज कर रहे थे।

कुल मिलाकर, #80sTrend सिर्फ पुरानी यादों या तस्वीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस दौर का उत्सव है जिसने आधुनिक और आत्मनिर्भर भारत की आर्थिक रीढ़ तैयार की थी।

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