हजारों करोड़ रुपये के कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। मामले के मुख्य सरगना और संचालक सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार कर लिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई भारतीय एजेंसियों द्वारा जारी इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस द्वारा की गई है। फिलहाल आरोपी को मस्कट के हाई-सिक्योरिटी अल खौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है, और भारत सरकार उसे वापस लाने के लिए औपचारिक प्रत्यर्पण (Extradition) की कानूनी तैयारियों में जुट गई है।
इंडोनेशिया के फर्जी पासपोर्ट पर सफर कर रहा था सौरभ
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर पिछले काफी समय से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रहकर अपना सिंडिकेट चला रहा था। वह ओमान में इंडोनेशिया के एक फर्जी पासपोर्ट के जरिए अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था, तभी मस्कट एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों ने उसे दबोच लिया। ओमान की स्थानीय पुलिस ने उसके खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और अवैध प्रवेश का नया मामला दर्ज किया है।
प्रत्यर्पण प्रक्रिया को लंबा खींचने की सोची-समझी रणनीति?
कानूनी विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में घुसना सौरभ की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। ओमान के कड़े कानूनों के तहत फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल पर 3 से 5 साल तक की कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
चूंकि ओमान की अदालतें पहले अपने देश में हुए अपराध (फर्जी पासपोर्ट) पर मुकदमा चला सकती हैं, इसलिए माना जा रहा है कि यह भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में देरी कराने की एक चाल है। अपनी पैरवी के लिए सौरभ ने मस्कट में वकीलों की एक बड़ी टीम भी तैनात कर दी है।
इंटरपोल (CCF) के सामने ‘राजनीतिक दांव’ हुआ था फेल
ओमान भागने से ठीक पहले, सौरभ चंद्राकर ने इंटरपोल की ‘कमीशन फॉर द कंट्रोल ऑफ इंटरपोल्स फाइल्स’ (CCF) में एक याचिका दायर की थी। उसने दावा किया था कि भारत में उसके खिलाफ दर्ज मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और उसे वहां निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी।
हालांकि, CCF ने उसकी इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए साफ किया कि यह मामला पूरी तरह से वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, न कि राजनीतिक उत्पीड़न से। इस फैसले के बाद उसका रेड नोटिस बरकरार रहा, जिसके तुरंत बाद उसने यूएई (UAE) छोड़ दिया था।
पहले भी हो चुका है हाउस अरेस्ट
यह पहली बार नहीं है जब सौरभ शिकंजे में आया हो। साल 2024 में भी दुबई में इंटरपोल के रेड नोटिस के आधार पर उसे हिरासत में लेकर कुछ समय के लिए हाउस अरेस्ट पर रखा गया था। उस समय भारत ने प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा था, लेकिन यूएई में कानूनी पेचीदगियों के चलते उसे कामयाबी नहीं मिल सकी थी और वह रिहा हो गया था।
भारत आने पर खुलेंगे कई बड़े राज
छत्तीसगढ़ के भिलाई में कभी जूस की दुकान चलाने वाले सौरभ चंद्राकर और उसके साथी रवि उप्पल ने दुबई बैठकर ₹6,000 करोड़ से अधिक का सट्टा साम्राज्य खड़ा किया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI की जांच के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार कई बॉलीवुड सितारों, प्रभावशाली नौकरशाहों और राजनेताओं से जुड़े हैं।
यदि इस बार भारतीय एजेंसियां उसका प्रत्यर्पण कराने में सफल रहती हैं, तो इस पूरे डार्क मनी ट्रेल और इसे संरक्षण देने वाले सफेदपोशों के चेहरों से पर्दा उठना तय माना जा रहा है।
