स्टेट ब्यूरो, रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्र उरला से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। यहाँ स्थित 3D (थ्री डी) फैक्ट्री में मंगलवार शाम हुए एक भीषण ब्लास्ट में तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री के संचालन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है (फैक्ट्री सील कर दी गई है)। वहीं, कारखाना प्रबंधन और सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है।
कैसे हुआ हादसा?
प्रारंभिक जांच और औद्योगिक सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, उरला स्थित इस 3D फैक्ट्री में फेरो अलॉय (Ferro Alloy) बनाने का काम होता था। मंगलवार की शाम करीब 6 बजे, फेरो एलॉयज डिवीजन में संचालित फर्नेस (भट्टी) में ‘लान्सिंग’ प्रक्रिया की जा रही थी। इसी दौरान वहां मौजूद ऑक्सीजन सिलेंडर में अचानक भीषण विस्फोट हो गया। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास का इलाका दहल उठा और वहां काम कर रहे तीन श्रमिकों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
मुख्यमंत्री साय और उद्योग मंत्री का कड़ा रुख; ₹30-30 लाख मुआवजा
इस दर्दनाक हादसे पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा:
“हादसे के तुरंत बाद कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री को बंद करा दिया गया है। मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जा रहा है। भविष्य में उद्योगों में सुरक्षा मानकों को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और कड़ाई से नियमों का पालन कराया जाएगा।”
प्रदेश के उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि मृतकों के आश्रितों के लिए ₹30-30 लाख के मुआवजे का प्रावधान कारखाना प्रबंधन और विभाग द्वारा किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं, और जांच रिपोर्ट आते ही जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी।
कांग्रेस का पलटवार: 8 सदस्यीय जांच समिति गठित, ₹1 करोड़ मुआवजे की मांग
इस औद्योगिक हादसे को लेकर सूबे की सियासत भी गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मामले की अपने स्तर पर पड़ताल के लिए 8 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, जिसकी कमान पूर्व मंत्री शिव डहरिया को सौंपी गई है। यह समिति घटनास्थल का निरीक्षण कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि पिछले ढाई वर्षों में छत्तीसगढ़ के औद्योगिक हादसों में 150 से अधिक मजदूरों की जान जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों की प्रभावी जांच करने में पूरी तरह विफल रही है। विपक्ष ने मांग की है कि:
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मृतक मजदूरों के परिजनों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
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फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
