दुर्ग/रायपुर। छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू को दुनिया भर में बिखेरने वाली पंडवानी विदुषी स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई के दशगात्र कार्यक्रम में शामिल होने आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की इस महान विभूति को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके शोकसंतप्त परिवार से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया।
इस शोकसभा के दौरान मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई की स्मृतियों को हमेशा के लिए जीवंत रखने के लिए तीन बेहद महत्वपूर्ण और बड़े ऐलान किए हैं।
सीएम साय की 3 बड़ी घोषणाएं: जो तीजन बाई को देंगी अमर पहचान
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1. ‘डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण’ की शुरुआत: राज्योत्सव के अवसर पर अब हर साल प्रदेश के उत्कृष्ट लोक कलाकारों को ‘डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण’ सम्मान से नवाजा जाएगा। यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ की लोक कला को नई ऊंचाई देने वाले कलाकारों को प्रोत्साहित करेगा।
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2. गनियारी स्कूल का होगा नामकरण: दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नाम अब स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई के नाम पर रखा जाएगा। इससे आने वाली पीढ़ी उनके कड़े संघर्ष और असाधारण उपलब्धियों से प्रेरणा ले सकेगी।
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3. रायपुर के संग्रहालय में सहेजा जाएगा ऐतिहासिक ‘तंबूरा’: तीजन बाई के हाथ में सजने वाला और उनकी पंडवानी साधना का सबसे बड़ा प्रतीक उनका ‘तंबूरा’ अब रायपुर के संग्रहालय (Museum) में पूरे राजकीय सम्मान के साथ संरक्षित किया जाएगा। देश-विदेश से आने वाले लोग इस ऐतिहासिक धरोहर के दर्शन कर सकेंगे।
“वे केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, पूरे देश की सांस्कृतिक पहचान थीं” – मुख्यमंत्री
श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री साय ने डॉ. तीजन बाई के योगदान को याद करते हुए कहा:
“स्व. डॉ. तीजन बाई केवल हमारे प्रदेश की नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर थीं। उन्होंने अपनी अद्भुत साधना और पंडवानी की कापालिक शैली से छत्तीसगढ़ी संस्कृति को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी। उनका संपूर्ण जीवन लोककला और परंपरा के संरक्षण को समर्पित रहा। उनका जाना कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”
इस दौरान मुख्यमंत्री ने तीजन बाई के पुत्र दिलहरण पारधी और अन्य परिजनों से मुलाकात की और उनके दुख में शामिल होकर सांत्वना दी।
