रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण इलाकों तक साफ पानी पहुंचाने के दावों की पोल खुल गई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर बेहद गंभीर और चौंकाने वाली खामियां उजागर हुई हैं।
मार्च 2024 तक की इस रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार ने योजनाओं के नाम पर 11,034.26 करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए, लेकिन जमीन पर नतीजा लगभग शून्य रहा।
कैग की रिपोर्ट के 3 सबसे चौंकाने वाले खुलासे
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1. ₹11,000 करोड़ खर्च, पर 29 हजार में से सिर्फ 172 योजनाएं पूरी:
राज्य में कुल 29,153 एकल और बहुग्राम जल योजनाएं स्वीकृत की गई थीं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से सिर्फ 172 एकल ग्राम योजनाएं ही पूरी हो पाईं। हद तो तब हो गई जब पूरी हुई योजनाओं में से केवल 32 योजनाएं ही ग्राम पंचायतों को सौंपी (हस्तांतरित) गईं।
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2. अधूरी योजनाओं के बावजूद गांवों को घोषित किया ‘हर घर जल’:
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 तक राज्य के सभी 19,656 गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था। लेकिन हकीकत में केवल 716 गांव (महज 3.64 प्रतिशत) ही प्रमाणित हो सके। कैग ने साफ तौर पर इशारा किया है कि कई मामलों में योजनाएं अधूरी थीं, फिर भी अधिकारियों ने कागजों पर गांवों को ‘हर घर जल’ घोषित कर दिया।
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3. कमजोर पड़ गई पानी की शुद्धता जांचने वाली ‘लैब’:
छत्तीसगढ़ में पानी की गुणवत्ता की जांच को लेकर भी कैग ने कड़ी चिंता जताई है। राज्य की 75 प्रयोगशालाओं (Labs) में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही ऐसी थीं जो सभी 13 निर्धारित मानकों पर पानी की जांच कर सकती हैं। वहीं, 37% लैब्स के पास राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) की मान्यता तक नहीं थी।
देश में 23वें स्थान पर खिसका छत्तीसगढ़
जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में सुस्ती के कारण छत्तीसगढ़ देश में 23वें स्थान पर है।
| योजना का पैमाना | लक्ष्य / हकीकत की स्थिति |
| स्वीकृत योजनाएं | 29,153 (एकल एवं बहुग्राम) |
| वास्तव में पूरी हुईं | सिर्फ 172 योजनाएं |
| कुल खर्च | ₹11,034.26 करोड़ |
| ‘हर घर जल’ प्रमाणित गांव | लक्ष्य: 19,656 गांव | हकीकत: केवल 716 गांव (3.64%) |
| घरेलू नल कनेक्शन | अगस्त 2019 में 6% था, जो मार्च 2024 तक 78% (38.97 लाख घर) पहुंचा। |
क्यों पिछड़ गया छत्तीसगढ़?
कैग की रिपोर्ट के अनुसार, मिशन के शुरुआती दो वर्षों में काम की रफ्तार बेहद धीमी थी। इस लापरवाही के कारण केंद्र और राज्य से मिलने वाला कुल 6,480.04 करोड़ रुपये का बजट (अंश) छत्तीसगढ़ को मिल ही नहीं सका। इसके अलावा, सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में क्षमता से अधिक कनेक्शन दे दिए गए, जिससे 28,984 घरों को जरूरत का न्यूनतम पानी भी नहीं मिल पा रहा है।
क्या है जल जीवन मिशन और CAG की भूमिका?
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जल जीवन मिशन (JJM): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2019 को शुरू किया गया देश का सबसे बड़ा ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम है। इसके तहत हर ग्रामीण घर में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर सुरक्षित पेयजल पहुंचाने का कड़ा मानक तय किया गया है।
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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG): भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित एक संवैधानिक संस्था है। यह सरकारी खजाने और जनता के टैक्स के पैसे का ऑडिट कर भ्रष्टाचार, गड़बड़ियों और सरकारी योजनाओं की कमियों को उजागर करती है।
कैग की सिफारिश: कैग ने छत्तीसगढ़ सरकार को सख्त हिदायत देते हुए योजना की गति बढ़ाने, पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और जल स्रोतों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाने की सिफारिश की है।
