West Bengal Politics: राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने दिया इस्तीफा, बीजेपी में जाने के संकेत; क्या बंगाल में गिरेगी ममता सरकार?

National Desk | पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को गुरुवार को उस समय एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उसके राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने उच्च सदन की सदस्यता से अचानक इस्तीफा दे दिया।

सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के बाद प्रकाश चिक बराइक तीसरे ऐसे सांसद हैं, जिन्होंने हाल के दिनों में पार्टी से दूरी बनाई है। बराइक के इस इस्तीफे के बाद अब राज्यसभा में टीएमसी सांसदों की संख्या घटकर मात्र 10 रह जाएगी।

इस्तीफे के बाद बोले बराइक— “जनता की राय का सम्मान किया”

राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को भेजे गए अपने आधिकारिक त्यागपत्र में बराइक ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए सभापति, उपसभापति और राज्यसभा सचिवालय का आभार व्यक्त किया।

इस्तीफे के तुरंत बाद मीडिया से बात करते हुए प्रकाश चिक बराइक ने बड़े संकेत दिए:

“पश्चिम बंगाल के लोगों की राय का सम्मान करते हुए मैंने आज अपना इस्तीफा सौंप दिया है।”

जब उनसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की संभावनाओं पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे पूरी तरह से नकारने के बजाय कहा कि “इसका फैसला समय आने पर स्पष्ट हो जाएगा।”

टीएमसी में बढ़ी बगावत: कुछ और सांसद छोड़ सकते हैं साथ!

सूत्रों के हवाले से मिल रही खबरों के अनुसार, टीएमसी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। आने वाले दिनों में कुछ अन्य राज्यसभा सांसद भी अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं।

विधायकों में भी असंतोष, पार्टी लाइन से हटे:

पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर केवल सांसदों में ही नहीं, बल्कि विधायकों में भी असंतोष की खबरें खुलकर सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी के कई विधायकों ने नेतृत्व (हाईकमान) की पसंद को दरकिनार करते हुए, नेता प्रतिपक्ष पद के लिए ऋतब्रता बनर्जी का खुला समर्थन किया है। इसने संगठन के भीतर चल रहे मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया है।

कौन हैं प्रकाश चिक बराइक?

  • प्रकाश चिक बराइक पश्चिम बंगाल के एक प्रमुख और प्रभावशाली आदिवासी नेता माने जाते हैं।

  • वे मुख्य रूप से सूबे के अलीपुरद्वार जिले से आते हैं।

  • अगस्त 2023 में टीएमसी ने उन्हें उच्च सदन का टिकट दिया था, जहां वे निर्विरोध निर्वाचित होकर राज्यसभा पहुंचे थे।

  • वे अपने समुदाय से राज्यसभा पहुंचने वाले बेहद सीमित आदिवासी चेहरों में से एक हैं, इसलिए उनका पार्टी छोड़ना टीएमसी के आदिवासी वोट बैंक के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।

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