CG Industrial Policy CECB: ने जारी किया नया ‘साइटिंग क्राइटेरिया’; नदी, स्कूल और आबादी से दूरी तय, राजपत्र में अधिसूचना जारी

CG Industrial Policy CECB:

8 जुलाई 2026 बिजनेस डेस्क, रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और राज्य के अन्य हिस्सों में नया उद्योग या फैक्ट्री शुरू करने की योजना बना रहे निवेशकों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) ने उद्योगों की स्थापना को लेकर बेहद सख्त नए नियम लागू कर दिए हैं। अब कोई भी उद्यमी अपनी मर्जी से कहीं भी फैक्ट्री नहीं खोल पाएगा। सरकार ने प्रदूषण और स्थानीय विवादों को जड़ से खत्म करने के लिए नया साइटिंग क्राइटेरिया तय कर दिया है, जिसकी आधिकारिक अधिसूचना राजपत्र में जारी हो चुकी है।

क्यों पड़ी नए नियमों की जरूरत?

रायपुर सहित प्रदेश के कई औद्योगिक और शहरी इलाकों में फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण को लेकर लगातार विवाद होते रहे हैं। कभी रिहायशी इलाकों, कभी स्कूलों के पास तो कभी लाइफलाइन मानी जाने वाली नदियों के किनारे उद्योग खुलने पर स्थानीय लोग विरोध जताते रहे हैं। हवा और पानी की शुद्धता बनाए रखने तथा भविष्य के इन पर्यावरणीय विवादों को रोकने के लिए CECB ने यह कड़ा कदम उठाया है। अब नए उद्योगों को मंजूरी तभी मिलेगी, जब वे इन दूरी के मानकों पर खरे उतरेंगे।

दूरी के नए कड़े नियम: कहां से कितना फासला जरूरी?

नए आदेश के मुताबिक, फैक्ट्रियों को आबादी, संवेदनशील क्षेत्रों और प्राकृतिक जल स्रोतों से एक निश्चित दूरी बनाए रखनी होगी। नियमों की अनदेखी करने पर पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) मिलना नामुमकिन होगा:

  • आबादी, स्कूल, मंदिर और अस्पताल: इन जगहों से न्यूनतम 500 मीटर की दूरी अनिवार्य की गई है।

  • संवेदनशील इलाके: अन्य चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों से कम से कम 200 मीटर का फासला रखना होगा।

  • जंगल (Forest Area): वन क्षेत्रों के करीब उद्योग लगाने के लिए न्यूनतम 100 मीटर का अंतर जरूरी है।

  • नदी, तालाब और जल स्रोत: नदियों और जलाशयों के पास फैक्ट्रियां खोलने पर सबसे ज्यादा सख्ती की गई है। रेड श्रेणी (Red Category) के अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को सतही जल स्रोतों या बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 500 मीटर दूर रहना होगा। वहीं ऑरेंज कैटेगरी (Orange Category) के उद्योगों के लिए यह दूरी 30 से 75 मीटर तय की गई है। इसके बाद खारून नदी या बूढ़ा तालाब के आसपास नए उद्योग लगाना आसान नहीं होगा।

उद्योगों और आम जनता पर क्या होगा असर?

पर्यावरणविदों और जानकारों का मानना है कि इस ठोस कानूनी प्रक्रिया के आने से रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रदूषण से बड़ी राहत मिलेगी। पहले स्थान चयन (Site Selection) को लेकर नियमों में स्पष्टता नहीं थी, जिससे बाद में फैक्ट्रियां बंद होने या अदालती विवादों का सामना करना पड़ता था। अब नए मानकों के कारण निवेशकों को शुरुआत में ही सही जगह चुनने में मदद मिलेगी, जिससे उनका निवेश सुरक्षित रहेगा।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *