Bhilai News: छत्तीसगढ़ में पहली बार दुर्लभ ल्यूसिस्टिक करैत की दस्तक, वन विभाग ने किया सफल रेस्क्यू

भिलाई/दुर्ग | डिजिटल डेस्क छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के लिहाज से एक बड़ी खबर सामने आई है। चरौदा स्थित पंचशील नगर के एक रिहायशी मकान से देश के सबसे विषैले सांपों में शुमार करैत (Krait) की एक बेहद दुर्लभ श्वेतवर्णी (ल्यूसिस्टिक) प्रजाति का सफल रेस्क्यू किया गया है।

वन विभाग ने इसे राज्य की प्राकृतिक विरासत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना है। सुरक्षित रेस्क्यू के बाद सांप को राजनांदगांव वनमंडल के मनगटा आरक्षित वन क्षेत्र (कक्ष क्रमांक RF-549) में छोड़ दिया गया है। प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने भी इस दुर्लभ घटना की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की है।

 घर में दिखा सफेद सांप, मच गया हड़कंप

21 जुलाई को पंचशील नगर के एक मकान में सफेद रंग का सांप देखे जाने से हड़कंप मच गया। गृहस्वामी ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही दुर्ग वनमंडलाधिकारी दिपेश कपिल के निर्देश पर वन विभाग की टीम और सर्प रेस्क्यूअर विजय शर्मा मौके पर पहुंचे। पूरी सतर्कता के साथ सांप का रेस्क्यू किया गया। जांच और परीक्षण के बाद विशेषज्ञों ने पुष्टि की कि यह कोई साधारण सांप नहीं, बल्कि दुर्लभ ल्यूसिस्टिक करैत (Leucistic Krait) है।

 क्या होता है ल्यूसिज्म? अल्बिनिज्म से कैसे है अलग?

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, ल्यूसिज्म (Leucism) एक दुर्लभ आनुवंशिक (Genetic) स्थिति है।

  • शरीर का रंग: इसमें त्वचा में मेलानिन पिगमेंट की कमी हो जाती है, जिससे सांप का रंग सामान्य काले-पीले पैटर्न के बजाय सफेद या बेहद हल्का दिखाई देता है।

  • अल्बिनिज्म से अंतर: ल्यूसिज्म और अल्बिनिज्म में मुख्य अंतर आंखों का होता है। अल्बिनिज्म में आंखें लाल या गुलाबी हो जाती हैं, जबकि ल्यूसिज्म में आंखों का रंग सामान्य और प्राकृतिक रहता है।

विशेषज्ञों का दावा: दक्षिण एशिया में ल्यूसिस्टिक करैत के मामले बेहद कम सामने आए हैं। भारत में इससे पहले महाराष्ट्र और ओडिशा में ही इसके सीमित मामले दर्ज किए गए हैं।

 क्या सफेद होने से कम हो जाता है जहर?

वैज्ञानिकों और स्नेक एक्सपर्ट्स ने स्पष्ट किया है कि रंग सफेद होने या आनुवंशिक बदलाव होने से सांप के विष और स्वभाव पर कोई असर नहीं पड़ता।

  • न्यूरोटॉक्सिक विष: करैत भारत के ‘बिग फोर’ (चार सबसे खतरनाक सांप) में शामिल है। इसका विष न्यूरोटॉक्सिक होता है, जो सीधे इंसान के तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर हमला करता है।

  • उतना ही जानलेवा: यह दुर्लभ ल्यूसिस्टिक करैत भी सामान्य करैत की तरह ही बेहद जहरीला और घातक है।

 मनगटा के आरक्षित वन में सुरक्षित पुनर्वास

सुरक्षा और स्वास्थ्य परीक्षण के बाद वन विभाग ने इसे राजनांदगांव वनमंडल के मनगटा आरक्षित वन क्षेत्र (RF-549) में सुरक्षित छोड़ दिया है, ताकि यह अपने प्राकृतिक आवास में संरक्षित रह सके। वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार का सांप दिखने पर उसे नुकसान न पहुंचाएं और तुरंत रेस्क्यू टीम को सूचित करें।

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