Nawa Raipur नकटी के बाद अब तुता गांव में ‘बुलडोजर’ की दहशत! NRDA ने 35 मकानों पर चिपकाया नोटिस, ग्रामीणों ने पूछा- इतने सालों से कहाँ था प्रशासन?

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नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे नकटी गांव में हुई हालिया बुलडोजर कार्रवाई का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब नवा रायपुर के तुता गांव में नया विवाद खड़ा हो गया है। नवा रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (NRDA) की एक कार्रवाई से पूरे गांव में हड़कंप मच गया है। NRDA ने गांव के करीब 35 मकानों पर अतिक्रमण का नोटिस चस्पा कर दिया है, जिसके बाद से इन घरों में रहने वाले परिवारों के बीच अपने आशियाने को खोने की दहशत पैदा हो गई है।

6 जुलाई तक का अल्टीमेटम: होगी एकपक्षीय कार्रवाई

NRDA द्वारा 30 जून को जारी किए गए इस नोटिस में ग्रामीणों पर साफ तौर पर प्राधिकरण की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जा (अतिक्रमण) करने का आरोप लगाया गया है। नोटिस के माध्यम से ग्रामीणों को अपनी बात रखने या जवाब देने के लिए 6 जुलाई तक का समय दिया गया है। इसके साथ ही कड़ी चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय-सीमा के भीतर जवाब पेश नहीं किया गया, तो प्रशासन द्वारा एकपक्षीय कार्रवाई (मकान तोड़ने की कार्रवाई) अमल में लाई जाएगी।

  • नया विवाद: नकटी गांव के बाद अब नवा रायपुर के तुता गांव में गहराया अतिक्रमण का विवाद।

  • अल्टीमेटम: NRDA ने 35 मकानों को दिया 6 जुलाई तक का समय, नहीं तो चलेगा बुलडोजर।

  • ग्रामीणों का आक्रोश: दशकों से रह रहे परिवारों के सामने अचानक खड़ा हुआ बेघर होने का संकट।

ग्रामीणों का तीखा सवाल: ‘इतने दशकों तक कहाँ सोया था प्रशासन?’

NRDA के इस नोटिस के बाद तुता गांव के ग्रामीणों में भारी आक्रोश और चिंता देखी जा रही है। ग्रामीणों का तर्क है कि वे इस जगह पर कोई आज-कल से नहीं, बल्कि पिछले 25 से 50 वर्षों (कई दशकों) से रह रहे हैं। उनकी पूरी पीढ़ी इसी जमीन पर पली-बढ़ी है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा है कि:

“अगर हमारा आशियाना अवैध था और हम अतिक्रमणकारी हैं, तो इतने दशकों तक प्रशासन और NRDA पूरी तरह खामोश क्यों बैठे रहे? तब हमें क्यों नहीं रोका गया?”

नकटी कांड के बाद बढ़ा तनाव

चूंकि हाल ही में नकटी गांव में हुई प्रशासनिक कार्रवाई और बुलडोजर चलने के मामले ने काफी तूल पकड़ा था, इसलिए तुता गांव के मामले को लेकर भी अब तनाव बढ़ने लगा है। 6 जुलाई की समय-सीमा नजदीक आने के कारण ग्रामीण अब लामबंद हो रहे हैं और इस कार्रवाई के विरोध में रणनीति बना रहे हैं। देखना होगा कि इस संवेदनशील मामले पर प्रशासन और सरकार का अगला कदम क्या होता है।

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